पानी होगा तब साफ होंगी नदियां

पानी होगा तब साफ होंगी नदियां

तेजी से बहने का नाम नहीं है नदी। नदी वह है जो जिस तरफ से गुजरे तो सबकी प्यास पूरी कर आगे बढ़ती है, ठहर कर।
हमारी अंधी दौड़ ने हमे हमारे प्राकृतिक जल स्रोतों के प्रति असम्बेदंशील बना दिया है। अधिकतर छोटी छोटी जल संरचनाएं बिलुप्त हो रही है। ज्यादातर नालो में तब्दील हो गई है। झील , ताल जो नदियों को पोषित करती रही है उनका भी अस्तित्व नाला खोदकर समापन की ओर है।
आज चारो ओर जल संकट है। ऐसे में हमे सबसे पहले अपने आस पास के जल स्रोतों के प्रति जिम्मेदार व जबाबदेह होना होगा। बरसात में कोशिश करनी होगी की आस पास के प्राकृतिक जल स्रोतों झील, तालाब आदि में जल संरक्षित हो। नालों की चाल कम करना होगा। भूजल भरण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेदार होना होगा। पानी की सुव्यवस्था हर व्यक्ति का कर्तव्य ही नहीं जिम्मेदारी भी है। जहां भी खाली पाती है समा जाता है पानी
धरती में समाने में अवरोध न उत्पन्न करे इंसान

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