आज भी याद है वो पॉलीथिन की पतंग उड़ाना

आज भी याद है वो पॉलीथिन की पतंग उड़ाना

बचपन से ही बढ़ा चंचल रहा हूँ और हमारी आर्थिक हालत भी बहुत ज्यादा मजबूत नही थी मगर फिर भी हम बचपन मे खेती के साथ ही रहते थे मगर जब तक मुझे स्कूल में भी दाखिला नही दिलाया गया हमारे पड़ौस के बच्चे स्कूल जाते थे तो में भी बिना किसी किताब कॉपी के उनके पीछे स्कूल में जाता रहता था और उनके स्कूल के दीवार जोकी 4 फिट ऊंची थीं उसी पर पूरे समय बैठकर देखा करता था कि ये कैसे पढ़ते है जिसके बाद हमको स्कूल में धाकिल किया फिर हम अपने साथियों के साथ पड़ते थे जबकि हमारी एक बचपन की दोस्ती जोकि आज भी कायम है कई वार हमको स्कूल में पड़ते समय मारपीट के साथ मुर्गा भी बनाया जाता जोकि आज याद आते है काफी रोमांचक लगता है मुझे आज भी याद है कि एक वार मुझे हमारे स्कूल के टीचर दीपक सर हमेशा आगे ही बिठाते थे और फिर सबसे पहले सवाल पर हमसे ही पूछा जाता जिसमे मुझे कभी भी हर सवाल आ जबाब देना अच्छा लगता था उन्ही की एक ये बात थी कि एक दिन हमसे अगली क्लास में हर शनिवार को छुपा छुपी का खेल खिलाया जाता था जोभी छुपाये हुए समान को तलाशता था उसे पेंसिल दिया करते थे ।बचपन मे हम सुबह से ही रात तक यही घर से दूर खेलने में निकाल दिया करते तव माँ नही तलास पाती तो घर मे न घुश्ने देने की सजा भी मिलना बड़ा आंनदित करने वाली होती थी क्यों कि जब दोस्तो के साथ खेलते समय काफी बार घायल होने से परेशान हो जाती एक वार हम अपने दोस्तों के साथ साइकल सीखने के लिए निकले और वो साईकल ऐसी की जिसमे सिर्फ हैंडल के साथ पहिया ही थे जिससे साइकिल सीखते समय जब हैंडल पकड़ते तो बाकी बाकी धक्का भी देते थे और उसी दौरान साइकिल खाई में जा गिरी और कई जगह जख्म भी हुए है ।में सहर में दूर दूर तक कॉमिक्स खरीदने को जाते थे और कॉमिक्स को पढ़ने के लिए दोस्तो से झगड़ा भी होता था लेकिन झगड़ने के कुछ देर बाद ही फिर उन्ही दोस्तो के साथ मिल जाते थे ।बचपन की वो पुरानी यादें बड़ी ही मजेदार होती है जब हमको पता चलती की आज कॉलोनी के आसपास किसी के यहां पर बीसीआर चलने बाला है जिसमे लोग रात भर के लिए तीन चार वीडियो के कैसिट लाया करते और वो लोग घरों के वहार चौपाल में लगाकर पूरा गाँव फ़िल्म देखते थे और जब कुछ लोग अपने घरों अंदर वीसीआर चलाते और दरवाजा बंद कर देते तो घंटो दरवाजे पर बैठना की कभी कोई वहार निकलेगा या अंदर जाएगा तो हमको भी अंदर घुसने का मौका मिल जाय वो रात रात भर घर से वीसीआर देखने को गायब रहना और वो हर पतंग के लिए दूर दूर तक भागकर उसे लूटकर लाना और फिर उसे दीवार पर लटकाने के वाद खुद उड़ाने के लिए पौलिथिन कि पतंग बनाकर उड़ाना उसके लिए घर मे रखी नारियल की झाड़ू से सींख निकाल निकाल कर उसे गायब कर देने के वाद माँ की फिर फटकार लगना ,के साथ ऐसी ही बड़ी और भी कहानी है जोकि जीवन के लिए हमेशा रंगीन यादगार बनी रहेगी ।

मथुरा से सुरेश सैनी

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