किताब में मोरपंख रखने का अनोखा रिवाज

किताब में मोरपंख रखने का अनोखा रिवाज

रांची –  मेरी पढ़ाई कक्षा ७ तक हिंदी माध्यम स्कूल में हुयी थी ।उसके बाद मेरा दाखिला एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में करा दिया गया। जब उस स्कूल में गया अँग्रेजी माध्यम था सर लोग जो भी कुछ पढ़ाते थे मुझे कुछ भी समझ में नहीं आता था। मैं बहुत शांत रहता था किसी भी लड़के से कुछ बात नहीं करता था। उस वक्त मै हमेशा पीछे से दूसरी सीट पर बैठा था और जो वहाँ के लोकल लड़के थे मेरे पीछे बैठे थे मै बहुत शांत रहता था ये सब मुझे पीछे से गुदगुदी करते थे एक तो विषय समझ नहीं आता था ऊपर से ये सब बहुत परेशान करते थे मै बहुत दिन तक सहन करता गया।

एक दिन इसी तरह विज्ञान का क्लास चल रहा था और कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसके ऊपर से पीछे वाले लड़के मुझे गुदगुदी किये जा रहे है। मै चलते हुए क्लास में पीछे घुमा उस लड़के को खींच करके दो मुक्का अच्छे से उसके चेहरे पर दे दिया । उसका पूरा चेहरा लाल और पूरा क्लास अवाक रह गया इतना शांत रहने वाला लड़का ऐसा कैसे कर सकता है विज्ञान वाले सर अपने सिर पर हाथ रख करके बैठ गए। सर बोल रहे है तुम दोनों क्या कर रहे हो ? मै बोला की सर मै अच्छे से सुन रहा था ये पीछे से गुदगुदी कर रहा था।

उस दिन सर कुछ पढ़ाये नहीं हम दोनों को बहुत समझाया गया । उस दिन के बाद अपुन की पुरे क्लास में इज्जत बढ गयी क्लास में अपना एक रुतबा सा हो गया । कोई भी लड़की मुझसे बोलती नही थी। अगले दिन हाय अतुल बोलना शुरू कर दिया । उसी से प्रभावित होकर १५ दिन के बाद एक फलानी बन गयी थी।

रिपोर्ट – हमारा ब्लैकबोर्ड डेस्क

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