मेरे स्कूल वाले दिन

आज भी याद है वो पॉलीथिन की पतंग उड़ाना

बचपन से ही बढ़ा चंचल रहा हूँ और हमारी आर्थिक हालत भी बहुत ज्यादा मजबूत नही थी मगर फिर भी हम बचपन मे खेती के साथ ही रहते थे मगर जब तक मुझे स्कूल में भी दाखिला नही दिलाया गया हमारे पड़ौस के बच्चे स्कूल जाते थे तो में भी बिना किसी किताब कॉपी...

बचपन वाले स्कूल के दिन

इंदौर -  हमारा स्कूल एक रेसिडेंशियल स्कूल था। यदि हमारी किसी भी दोस्त के मम्मी-पापा उनसे मिलने आते तो वे साथ में टिफिन भी लाते थे,जो हम सब मिलजुलकर खाते थें।हर वर्ष युवा दिवस पर ,हमारे स्कूल में सूर्य नमस्कार+योगा कराया जाता था। जो पूर्णतः सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण होता था। भले ही रोज...

बहुत याद आते हैं बचपन के ख्वाहिश, फरमाइश, ज़िद वाले दिन

वो बचपन जब सुकून और हंसी हमारे सबसे पक्के दोस्त होते हैं। जब हम बिना बात खिलखिलाकर हंस भी लेते हैं और छोटी सी बात पर सबसे आगे आंसू भी बहा लेते हैं। बचपन में ख्वाहिशे, फरमाइशे, ज़िद सब अपनी होती हैं। यूं तो बचपन से जुड़ी हर याद ही खास होती है लेकिन...

‘हमरे गाँव वाला स्कूली मड़इया निक लागेला’ कहकर भावुक हो गईं प्रीति पाण्डेय

मैं प्रीति पाण्डेय अपने स्कूल के दिनों का अनुभव एक भोजपुरी गीत के माध्यम से आप सभी के समक्ष ब्यक्त कर रही हूं । मैं जहाँ पढ़ाई कर रही थी उस स्कूल के प्रिंसिपल मेरे मौसा जी थे , जो बहुत गुस्से वाले थे । बच्चे तो बच्चे स्कूल के टीचर और बच्चों के...

जीवन का आइना है अपना ब्लैक बोर्ड

गोंडा -  एकपल ठहर कर तो देखिए दहलीज पर कदम रखते ही आप अपने बचपन की यादों मे खींचते चले जायेंगे और फिर सारी पिक्चर सामने आनी शुरू हो जायेगी।आज कुछ ऐसा ही मेरे साथ हुआ। जैसे ही मैने अपने बचपन के स्कूल की दहलीज पर कदम रखा सामने ही बरामदे मे मुझे वह...

वो क्लास की बैक बेंच का मजा अमरूद और समोसे की खुशबू

बचपन कानपुर में बीता और पढाई भी वहीं हुई। कानपुर के बचपन के दोस्त, टीचर सब याद हैं। बचपन की कहानियां सहेजे तिकोना पार्क, मौनी घाट वाले हनुमान जी शेरा बाबू वाले हनुमान जी, सेंटर वाला पार्क हैं तो जरूर पर चहल पहल नहीं है। अपने पुराने स्कूल से गुजरा तो बहुत कुछ याद...

मैंने कॉमिक्स से ही पढ़ना सीखा

आज अचानक अपने स्कूल का पहला दिन याद आ गया.छोटी होने के कारण कई फायदे तो थे लेकिन नुकसान भी था...मुझे घर पर सारे दिन अपने भाइयों के स्कूल से घर आने का इंतजार करना पड़ता था,इस बोरियत को मिटाने के लिए मम्मी मुझे अक्षर ज्ञान और लिखना सिखाते थे......इसी वजह से मैं स्कूल...