पिकनिक स्पॉट

मजा आ गया….  जानकीकुंड में नहाना…. चित्रकूट में मिली थी खूब छूट 

सारी छुट्टियां खत्‍म हो रही थी। पापा कहीं घुमाने न ले जाते। जून भी खत्‍म हो रहा था। कभी कोई काम कभी काम। बस जब देखो तब...  अरे बेटा बाद में चले जायेंगे। क्‍या हुआ। राघव और दिव्‍यांश के मम्‍मी पापा तो हर बार बाहर घूमने जाते हैं। वंशिका भी अपनी नानी के घर...

पानी होगा तब साफ होंगी नदियां

तेजी से बहने का नाम नहीं है नदी। नदी वह है जो जिस तरफ से गुजरे तो सबकी प्यास पूरी कर आगे बढ़ती है, ठहर कर। हमारी अंधी दौड़ ने हमे हमारे प्राकृतिक जल स्रोतों के प्रति असम्बेदंशील बना दिया है। अधिकतर छोटी छोटी जल संरचनाएं बिलुप्त हो रही है। ज्यादातर नालो में तब्दील हो...

सार्थक विकास : बढ़ रही जन भागीदारी

अनशन , हड़ताल और चक्का जाम आखिरी रास्ते है। उसके पहले समुचित पहल, कोशिश जरूर होनी चाहिए। किसी दौर में तो राजनीतिक और सामाजिक दोनों प्रकार के संगठन के अधिकतर प्रयास इन्ही कार्यो के रूप में होते रहे। कुछ साल से इस तरह के कार्य सही समझ, निरंतर विकास में बढ़ती जन भागीदारी...