गुजरात के स्‍कूलों में बच्‍चे करेंगे अपने साथियों का इलाज

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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि काजल भूपतभाई कांत (11) नाम के ‘बाल डॉक्टर’, जो कि अरवल्ली जिले के नवगाम गांव स्थित सरकारी स्कूल में 6वीं कक्षा के छात्र हैं, उन्हें प्राथमिक स्कूलों के मद्देनजर पायलट प्रॉजेक्ट के लिए नामित किया गया है। है

स्टेथस्कोप से लैस होंगे ‘बाल डॉक्टर्स’
‘बाल डॉक्टर्स’ के पास स्टेथस्कोप होगा। इसके साथ ही उनके पास आयुर्वेदिक दवाएं भी होंगी, जो कि वह अपने साथी छात्रों को दे सकेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, बाल डॉक्टर्स को आयुर्वेदिक दवाओं को स्टॉक उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वह स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या ने निपट सकें। स्वास्थ्य विभाग का आदेश है, ‘प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में एक बाल डॉक्टर की नियुक्ति की जाएगी, जिसके लिए राज्य शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर काम करेंगे।’

छात्रों को करेंगे प्रोत्साहित
आदेश के मुताबिक, ‘सामान्य बीमारियों में ये ‘बाल डॉक्टर्स’ लोगों का आयुर्वेदिक उपचार कर सकेंगे। वह अन्य छात्रों को मिड-डे मील खाने से पहले हाथ धोने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इसके साथ ही वह साप्ताहिक रूप से प्रत्येक बुधवार को आयरन और फॉलिक ऐसिड सप्लेमेंटेशन (डब्ल्यूआईएफएस) प्रोग्राम (नैशनल हेल्थ मिशन के तहत) आयोजित करेंगे। यही नहीं वह अपने साथी छात्रों को नशामुक्त करने में मदद करेंगे और सीजनल बीमारियों के बारे में जानकारी देंगे।’

बाल डॉक्टर्स के पास होगा एप्रन और बैज
प्रत्येक ‘बाल डॉक्टर’ को डॉक्टर की तरह एप्रन और बैज दिया जाएगा। स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, ‘इसके इतर उन्हें एक टॉर्च और एक आयुर्वेदिक दवाइयों की किट उपलब्ध कराई जाएगी। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के मद्देनजर बुकलेट और पोस्टर्स भी दिए जाएंगे।’ बच्चों को एक ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

नोडल टीचर की होगी नियुक्ति
स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग द्वारा निगरानी के लिए एक नोडल टीचर की नियुक्ति भी की जाएगी। राज्य हेल्थ कमिश्नर डॉ. जयंती रवि ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘प्रत्येक स्कूल में हम ऐसा कॉन्सेप्ट लाने की कोशिश कर रहे हैं। बच्चे ‘बाल डॉक्टर्स’ के रूप में पहचाने जाएंगे, जो कि आगे चलकर डॉक्टर बन सकते हैं।’
सोर्स- नवभारत टाइम्‍स

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